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एक तरफ तो पाकिस्तान करोड़ो डॉलर की मदद अमेरिका से लेता है वहीं दूसरी तरफ खुद ही अमेरिका की खुफिया एजेंसियों पर आतंकी हमला करवाता है।  अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा अर्काइव ने इस  बात का खुलासा किया है। अमेरिका के मुताबिक अफगानिस्तान में उसकी खुफिया एजेंसी सीआईए के कैंप पर हमला करने के लिए पाकिस्तान ने फंड दिया था। इस हमले में सीआईए के सात एजेंट और कांट्रेक्टर मारे गए थे। उसके अलावा अन्य लोगों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।

पहले यह एक खुफिया जानकारी थी जिसे बाद में नेशनल सिक्योरिटी अर्काइव को दिया गया। बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी के हक्कानी आतंकी संगठन को वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने 2 लाख डॉलर का भुगतान सीआईए के कैंप पर करने के लिए दिया था। सीआईए के कैंप पर 30 दिसंबर, 2009 को हमला हुआ था।

सीआईए के कैंप पर डबल एजेंट और जॉर्डन के डॉक्टर अबु-मुलाल अल बालावी ने आत्‍मघाती हमला किया था। सीआईए भी एजेंट अबु-मुलाल अल बालावी की मदद ओसामा बिन लादेन को ढूंढने के लिए कर रही थी। पर एजेंट ने डबल गेम खेल दिया और सीआईए के कैंप पर हमला कर दिया। इस हमले में दो महिला सीआईए एजेंट जेनिफर लाएने मैथ्यू और हैनसन की मौत हो गई थी जेनिफर उस सीआईए बेस का कमांड संभालती थी। वहीं एलिजाबेथ टारगेट विश्‍लेष्क के तौर पर काम करते थे। जीरो डॉर्क थ्रर्टी मूवी में इस आतंकी हमले के सीन को जस का तस फिल्माया गया है।

आपको बताते चले कि पाकिस्तान पर पूर्व में भी आतंकवाद को पनाह देने के आरोप लगते रहे हैं। इसके बावजूद अमेरिका की तरफ से अरबों रूपए की मदद पाकिस्तान को मिलती रही है।

अफगानिस्तान में कैंप चेपमैन पर हुआ आत्मघाती हमला अमेरिकी खुफिया एजेंसी के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा आत्मघाती हमला था इससे पहले वर्ष 1983 में लेबनान के बेरूत में स्थित अमेरिकी दूतावास पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें आठ सीआईए के अधिकारी मारे गए थे।

अरबों की मदद देने वाले अमेरिका की खुफिया एजेंसी पर पाकिस्तान ने करवाया था आत्मघाती हमला

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