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अब एमएसएमई ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छोटे व मध्यम उद्यमियों के कर्ज को गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित करने के नियमों में बदलाव नहीं करने व अधिक राशि के कर्ज से पहले थर्ड पार्टी सैंपलिंग के नियमों की वजह से ये मोर्चा खोला है। छोटे उद्यमियों को इन नियमों की वजह से भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे) ने आरबीआई से इन नियमों में बदलाव करने की मांग की थी। लेकिन आरबीआई की तरफ से इस मामले में कोई सुनवाई नहीं की गई। फिस्मे के महासचिव अनिल भारद्वाज ने बताया कि छोटे उद्यमी अगर कर्ज लेने के बाद एक माह की किस्त किसी कारणवश नहीं दे पाते हैं तो बैंक उन्हें स्पेशल मेंशनिंग अकाउंट में डाल देता है, जिस वजह से उस उद्यमी की सारी सुविधाएं बंद हो जाती है।

उन्होंने बताया कि बैंकों के ये नियम बिल्कुल अव्यवहारिक है क्योंकि छोटे उद्यमी जिन्हें अपना माल बेचते हैं, वे कम से कम 180 दिनों के बाद ही माल का भुगतान उद्यमियों को करते हैं। फिस्मे के अध्यक्ष संगम कुराडे ने बताया कि छोटे उद्यमियों को बैंकों से अधिक राशि के कर्ज लेने के दौरान थर्ड पार्टी रेटिंग करानी पड़ती है और इस काम में उन्हें दो लाख रुपये का खर्च आता है। कई बार थर्ड पार्टी रेटिंग सही तरीके से नहीं की जाती है और उद्यमियों के आवेदन को खारिज कर दिया जाता है।

भारद्वाज ने बताया कि इन दोनों मांगों को लेकर फिस्मे की तरफ से आरबीआई गवर्नर को पत्र लिखा गया था, लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने के बाद उन्होंने राजन को फिर से पत्र लिखकर यह कहा है कि वह काफी अच्छे आदमी हैं, लेकिन वह उद्यमियों की मांग को पूरा करने में असफल रहे हैं। हाल ही में वाणिज्य व उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी ऊंची ब्याज दरों की वजह से उद्योग व व्यापार के प्रभावित होने की बात कहते हुए आरबीआई गवर्नर को आड़े हाथों लिया था। भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने पहले से ही राजन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

अब एमएसएमई ने खोला राजन के खिलाफ मोर्चा

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