rent-a-womb_24_08_2016

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को सरोगेसी नियमन विधेयक-2016 को मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक मां-बाप बनने के लिए अब पैसे देकर किराए की कोख लेना संभव नहीं हो सकेगा। विधेयक में जरूरतमंद निःसंतान दंपतियों के लिए कमर्शियल सरोगेसी पर रोक और नीति परक सरोगेसी की अनुमति का प्रावधान किया गया है।

सरोगेसी (नियमन) बिल की मुख्य बातें

  1. देश में सिर्फ भारतीय ही ले सकेंगे सरोगेसी की सुविधा
  2. कानूनी तौर पर मान्य दंपती को ही मिलेगा फायदा
  3. अविवाहित, समलैंगिक, लिव इन, सिंगल पैरेंट्स को इजाजत नहीं
  4. शादी के पांच वर्ष बाद ही दंपति ले सकेंगे सरोगेसी की मदद
  5. पहले से एक भी बच्चा है तो नहीं ले सकेंगे सरोगेसी सुविधा
  6. कानून का उल्लंघन करने वालों को 10 वर्ष की कैद संभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में विधेयक को मंजूरी दे दी गई। बैठक के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि यह विधेयक महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इसका लंबे समय से इंतजार था।

विधेयक में ये हैं प्रावधान

अब कोई भी निःसंतान दंपती पैसे देकर किराए की कोख खरीद नहीं सकेंगे।

बगैर पैसे के अगर कोई महिला अपनी इच्छा से किराए की कोख देना चाहे तो वे ले सकते हैं।

संतान की इच्छुक दंपती कानूनी रूप से वैध होना चाहिए।

उन्हें अनफिट मेडिकल सर्टिफिकेट देना होगा कि दोनों में से कोई एक संतान पैदा करने की स्थिति में नहीं है।

सिंगल पैरेंट्स, लिवइन पार्टनरों और होमोसेक्सुअल जोड़ों को सरोगेसी की अनुमति नहीं होगी।

विवाहित दंपती को सरोगेसी की अनुमति उसी स्थिति में मिलेगी, जब उनके विवाह के कम से कम पांच साल हो गए हों।

सरोगेसी की अनुमति सिर्फ भारतीय नागरिकों को होगी। अनिवासी भारतीयों या ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्डधारकों को इसकी अनुमति नहीं होगी।

जिन दंपतियों के बच्चे हैं या बच्चे को गोद लिया है, उन्हें सरोगेसी की अनुमति नहीं होगी।

इसलिए विधेयक की पड़ी जरूरत

सरकार ने हाल में स्वीकार किया था कि वर्तमान में किराए की कोख संबंधी मामलों को नियंत्रित करने के लिए कोई वैधानिक तंत्र नहीं है।

इस कारण ग्रामीण एवं आदिवासी इलाकों सहित विभिन्न क्षेत्रों में किराए की कोख के जरिए गर्भधारण के मामले हुए। इनमें शरारती तत्वों द्वारा महिलाओं के संभावित शोषण की आशंका रहती है।

विदेशियों के लिए भारत सरोगेसी का हब बन गया है। अनैतिक सरोगेसी की घटनाएं सामने आई हैं।

सरोगेसी बोर्ड बनेगा

स्वराज ने बताया कि केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य सरोगेसी बोर्डों का गठन होगा। बोर्ड सरोगेसी के मामले देखेंगे।

बॉलीवुड हस्तियों पर व्यंग्य

स्वराज ने कहा कि इन दिनों बॉलीवुड हस्तियों में बच्चे होने के बावजूद सरोगेसी का चलन बढ़ गया है। इसकी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “जरूरत की चीज शौक बन गई है। इन दिनों चलन हो गया है कि जिन लोगों के बेटा-बेटी दोनों हैं, इसके बावजूद वे सरोगेसी के जरिए तीसरा बच्चा पैदा कर रहे हैं। क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनकी पत्नियों को किसी तरह का दर्द हो।”

कैबिनेट के ये फैसले भी

11 राज्यों में रेल पटरियों का विस्तार : कैबिनेट ने रेल ढांचे को मजबूत करने के लिए 21 हजार करोड़ के रेललाइन विस्तार कार्यक्रम को मंजूरी दी है। इसके तहत 1937.38 किलोमीटर लंबाई के ट्रैक निर्माण की 9 परियोजनाएं चलाई जाएंगी।

इन परियोजनाओं से झारखंड, प. बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और असम को फायदा होगा।

आतंकी हमला पीड़ितों का मुआवजा बढ़ा : कैबिनेट ने आतंकी और नक्सली हमलों में मारे गए लोगों के परिजन को मुआवजा राशि में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि अब सीमा पार फायरिंग में मौत पर परिजन को 5 लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा। आतंकी और नक्सली हमलों की स्थिति में यह मुआवजा तीन लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया गया है।

 

 

अब आसान नहीं रहेगी सरोगेसी की राह

| उत्तर प्रदेश | 0 Comments
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