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सिर्ते। इराक के मोसुल के बाद अब लीबिया के सिर्ते में भी इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकियों के पांव उखड़ने लगे हैं। छह माह तक चले कड़े संघर्ष के बाद लीबियाई सेना रणनीतिक शहर सिर्ते के भीतर तक पहुंचने में कामयाब हुई है। महज एक वर्ग किलोमीटर दायरे में मोर्चा थामे मुट्ठी भर आतंकी लोहा ले रहे हैं।

आतंकियों की संख्या कम रह जाने के बावजूद सेना को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ेगा। घिजा में लीबियाई सेना के साथ लड़ाई में जुटे 37 वर्षीय व्यापारी उस्मान इसा ने कहा, ‘हम अनुमान से कहीं ज्यादा प्रतिरोध का सामना कर रहे हैं। वे लोग मोर्चा से हटने को तैयार नहीं हैं। यहां तक कि मकान भी उनपर ढह रहा हो तो भी वे डटे रहते हैं। वे जानते हैं कि हर हाल में उन्हें मरना है इसलिए वे लड़ाई में जुटे रहते हैं।’

सिर्ते में हार से आईएस की दुनिया में पांव पसारने की क्षमता ध्वस्त हो जाएगी। इसके अलावा इराक और सीरिया के बाहर अपने गढ़ से भी वह वंचित हो जाएगा। मोसुल और उसके तुरंत बाद यहां हार से आईएस का नैतिक बल कमजोर होगा और बहाली क्षमता भी खत्म हो जाएगी।

मोसुल से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित इस कस्बे में मार कोर्केइस चर्च की घंटी दो वर्षों तक चुप रहने के बाद फिर से बज उठी। क्षेत्र पर आईएस का कब्जा होने के बाद से चर्च बंद रहा।

कुर्द पेशमर्ग लड़ाकों ने सात नवंबर को इस कस्बे पर कब्जा कर लिया था। आईएस ने निनेवेह मैदान में ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों को दंड दिया था। यह क्षेत्र दुनिया में ईसाइयों के सबसे पुराने केंद्रों में से एक माना जाता है।

अब आईएस आतंकियों के पांव उखड़ने लगे

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