उत्तर प्रदेश में प्रशासन को जवाबदेह बनाने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऑनलाइन जन सुनवाई पोर्टल व मोबाइल एप की शुरुआत की। लेकिन अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने तक वह इस पोर्टल पर लंबित शिकायतों का पहाड़ छोड़कर जाते दिख रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की शुरुआत की थी। जिसमें संबंधित अधिकारी को नियत तारीख तक जवाब देने की बाध्यता थी।

लेकिन प्रदेश की अफसरशाही ऑनलाइन व्यवस्था में भी ‘ऑफलाइन मोड’ में ही चलती नजर आई। जिसके कारण आज भी दो लाख से ज्यादा शिकायतों की नियत तारीख बीत चुकी है और संबंधित अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

इन शिकायतों के निस्तारण में अधिकारी एक-दूसरे को आदेश अग्रसारित करते जा रहे हैं और अंतिम निस्तारण की जिम्मेदारी से बचते दिखाई दे रहे हैं।

देखा गया है कि लंबित शिकायतें कई अधिकारियों के हाथ से गुजरती रही हैं और हर अधिकारी अपने अधीनस्थ को कार्रवाई की जाए की टिप्पणी के साथ शिकायत आगे बढ़ाता रहा है।

 

अखिलेश ने की जन सुनवाई पोर्टल व मोबाइल एप की शुरुआत

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